गांधीनगर (गुजरात) की एक निचली अदालत ने अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) की तरफ से दायर मानहानि की शिकायत के मामले में पत्रकार रवि नायर को दोषी करार देते हुए एक साल की सज़ा सुनाई है।
इंडियन एक्सप्रेस में पीटीआई के हवाले से छपी एक खबर के अनुसार शिकायत नायर के ट्वीट की एक श्रृंखला थी, जो, आरोप है कि एईएल और अडानी समूह के संदर्भ में गलत और बदनामीकारक थे।
एईएल का कहना था कि ट्वीट वैध आलोचना के तहत नहीं बल्कि लोगों और निवेशकों की नजर में कंपनी की विश्वसनीयता गिराने के उद्देश्य से थे।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना कि एईएल ने अपना मामला सफलतापूर्वक स्थापित किया और नायर को दोषी करार दिया।
अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने हाल ही में इस पर चिंता जतायी थी कि अडानी समूह लंबे समय से पत्रकारों को चुप कराने के लिए मुकदमेबाज़ी का सहारा ले रहे हैं और भारत सरकार से माँग की थी कि स्ट्रेटेजिक लॉसूट्स अगेंस्ट पब्लिक पार्टिसिपेशन (स्लैप) के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया जाए।
आरएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह ने 2017 से कम से कम 15 पत्रकारों के कार्य में बाधा डालने के लिए मुकदमे किए हैं। इन पत्रकारों में परंजॉय (सात मामले), अबीर दासगुप्ता (चार मामले) और रवि नायर (दो मामले) शामिल हैं। आरएसएफ की दक्षिण एशिया प्रमुख सेलिया मार्शियर ने एक बयान जारी कर कहा कि खोजी पत्रकारों को इस तरह परेशान किया जाना भारत में मीडिया स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है क्योंकि यहाँ कानूनी प्रक्रिया ही सज़ा बन जाती है।
हम भारत सरकार से माँग करते हैं कि पत्रकारिता को बाधित करने के लिए क़ानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बंद करने के लिए स्लैप के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया जाए।
रवि नायर के ख़िलाफ़ यह मामला सितम्बर 2021 में दाखिल किया गया था जो अडानीवॉच वेबसाइट पर उनके लेखों समेत सोशल मीडिया “एक्स” पर पोस्ट और रिपोस्ट को लेकर किया गया था। नायर को शिकायत का पता जुलाई 2022 में तब चला जब उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी हुआ जो पहली सुनवाई में पेशी पर रद्द किया गया।
(जनचौक ब्यूरो)